बचपन के किस्से मुझे जब भी याद आते हैं,
माँ, तेरे वो पैरो के छाले बहुत रुलाते हैं
सब साथ बैठ खाना जब भी खाते थे
तुझे रोटियों की फ़िक्र थी
और हम फिर भी तुझे सताते थे
मेरी भूक के बढ़ने से तेरी भूक को मिटते देखा है
माँ मैंने तुझे दिन का बचा खाना खाते हुए देखा है
मेरी गम की आँधियों में,
तूने अपने आँचल में छुपाया था,
मेरे घर से बाहर निकलते ही,
तेरा जी हर बार घबराया था
मुझे सर्दी से बचाती,
माँ, मैंने तुझे बुखार में तपते देखा है
मेरी गलती के लिए तुझको
ज़माने से लड़ते हुए देखा है
मुझे याद है मैंने पापा की जेब से,
जब भी पैसे चुराए थे,
पकडे जाने पर हमेशा
तुमने खुद पर इलज़ाम लगाए थे
अकेले मैं बुला कर तुमने
मुझे हमेशा खरी खोटी सुनाई थी,
पापा की चप्पल से बचा के
खुद को ढाल बनायीं थी
मेरे मेहेंगे कपड़ो की ज़िद पर तुझको,
खुद की ख्वाहिशो को दफनाते देखा है,
हाँ माँ, मैंने तुझे तेरे दुःख में,
मेरे लिए मुस्कुराते हुए देखा है
जन्मदिन मुबारक हो माँ 💓💓💓
माँ, तेरे वो पैरो के छाले बहुत रुलाते हैं
सब साथ बैठ खाना जब भी खाते थे
तुझे रोटियों की फ़िक्र थी
और हम फिर भी तुझे सताते थे
मेरी भूक के बढ़ने से तेरी भूक को मिटते देखा है
माँ मैंने तुझे दिन का बचा खाना खाते हुए देखा है
मेरी गम की आँधियों में,
तूने अपने आँचल में छुपाया था,
मेरे घर से बाहर निकलते ही,
तेरा जी हर बार घबराया था
मुझे सर्दी से बचाती,
माँ, मैंने तुझे बुखार में तपते देखा है
मेरी गलती के लिए तुझको
ज़माने से लड़ते हुए देखा है
मुझे याद है मैंने पापा की जेब से,
जब भी पैसे चुराए थे,
पकडे जाने पर हमेशा
तुमने खुद पर इलज़ाम लगाए थे
अकेले मैं बुला कर तुमने
मुझे हमेशा खरी खोटी सुनाई थी,
पापा की चप्पल से बचा के
खुद को ढाल बनायीं थी
मेरे मेहेंगे कपड़ो की ज़िद पर तुझको,
खुद की ख्वाहिशो को दफनाते देखा है,
हाँ माँ, मैंने तुझे तेरे दुःख में,
मेरे लिए मुस्कुराते हुए देखा है
जन्मदिन मुबारक हो माँ 💓💓💓
