Friday, 26 January 2018

तू ही जान है मेरी ❤️

ओंस की बूँदो से सजी,
वो हसीन रात सुहानी थी।
जब तेरे आश्चर्यजनक बुलावे पर,
मैंने तेरे घर आने की ठानी थी।

एक नए दोस्त से मुलाक़ात होगी,
ये दिल ने मेरे मानी थी।
पर तुझे स्टेशन में रिक्शे पर देख,
मैं अचम्भित, और आँखो में हैरानी थी।

बातों से सजी थी लड़ियाँ,
नए एहसास के जाम खुले थे।
पसंद ना पसंद की सच्चाई के बीच,
हम कुछ सच बोलना भूले थे।

कुछ तो बात थी अलग हम में,
जो दो मासूम से दिल मिले थे।
तभी तो अनजानेपन के बीच,
अपनेपन के गुलज़ार खिले थे।

अल्फ़ाज़ो की नाव दोस्ती के भँवर में,
लगातार गोते खाने लगी।
चाँदनी को दो और हमसफ़र मिले,
और यूँ ही रात बीत जाने लगी।

बचपन के दाव पेंच तो शुरू ही थे।
गपशप के नज़राने पेश किए ही थे।
वार्तालाप ओर विचार विमर्श की चर्या में,
लगा पहले हम मानो कभी मिले ही थे।

वो आग़ाज़ था एक सफ़र का,
जिसका अंजाम अंत तक तय नहीं।
तूने मुझे समझा, मैंने तुझे जाना,
और किसी विषय का भय नहीं।

मित्रता के आग़ोश में,
यूँ ही प्यार बँटता चला।
कुछ तुम चले, कुछ मैं चला,
और यूँ ही सफ़र कटता चला।

हमारे बीच भी आने वाले
उतार चड़ाव कुछ कम ना थे।
किसी ग़ैर पर बात करके,
लड़ने वालों में शुमार हम भी कम ना थे।

अब तक हर ग़लतफ़हमी का अंजाम,
मैंने रात को SORRY से किया है।
और तूने ज़िद को गले लगा के,
दोस्ती से ख़तरा मोल लिया है।

परंतु, मतभेद तो वो संघर्ष है,
जो हर दोस्ती में रंग लाया है।
जहाज़ तो वही अटल होता है ना,
जो उफ़ंते तूफ़ाँ को पार कर पाया है।

मित्रता का कोई मोल नहीं,
वो तो अनमोल कही जाती है।
याद रखो! ज़िद की जंग में अक्सर,
दूरियाँ जीत जाती हैं। 

तुझसे प्यार बेशुमार करता हूँ।
तभी तो तुझे खोने से डरता हूँ। 
भूत ओर वर्तमान तो मस्त कट गए,
मैं हमारे भविष्य की फ़िक्र करता हूँ।

तेरी दोस्ती ने मुझे एक नया जहाँ दिया,
मेरी मायूस सी ज़िंदगी को फिर खिला दिया।
क़र्ज़दार हूँ मैं उस खुदा का बेपनाह दिल से,
जिसने इस जनम में मुझे, तुझसे मिला दिया।

चल एहसास को क़ायम रखें,
तनहायी में यहाँ, तू साँस हैं मेरी।
मेरा तुझसे कोई ख़ूँ का वास्ता ना सही,
मेरी जान में तू नहीं,
तू ही जान है मेरी। ❤️
तू ही जान है मेरी। ❤️





4 comments:

  1. Enjoyed reading it Lalit, deep and thoughtful! Keep it up :)
    Swamu

    ReplyDelete
  2. I could feel the emotions, it reminded me of the love I've forgotten. I loved the last stanza! ❤️

    ReplyDelete
  3. Areee waaah! Bas, tumne relate kar liya, isse bada compliment kya hi ho sakta hai phir. <3

    ReplyDelete

Search This Blog